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महिला सशक्तिकरण के लिए डॉ. दिव्या ज्योति ने किया सराहनीय कार्य, बनी रोल मॉडल

चाणक्य फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिव्या ज्योति को शिक्षा एवं सामाजिक सशक्तिकरण में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रतिभा सम्मान समारोह‑2026 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उनके सामाजिक कार्यों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण कार्य एवं उल्लेखनीय योगदान, उनके दूरदर्शी नेतृत्व, शिक्षा में परिवर्तनकारी पहल और विशेषकर लड़कियों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुलभ बनाने के निरंतर प्रयासों के आलोक में दिया गया।

भारत प्रतिभा सम्मान परिषद् एक राष्ट्रीय मंच है, जो विभिन्न क्षेत्रों में अनुकरणीय सेवा और नवाचार को सम्मानित करता है। पूरे भारत से मिले 5000 से अधिक नॉमिनेशन में से 30 अलग-अलग क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु यह राष्ट्रीय पुरस्कार आज दिल्ली के NDMC सेंट्रल हॉल के एक समारोह में मुख्य अतिथि पद्मश्री उमा तुली जी (प्रख्यात समाजसेविका एवं शिक्षाविद्) तथा मेज़र जनरल यशपाल सिंह मोर जी के गरिमामय उपस्थिति में दिया गया है।         

डॉ. दिव्या ज्योति का चयन इस बात का प्रमाण है कि उनके कार्य का प्रभाव बिहार तथा अन्य क्षेत्रों के हजारों छात्रों के जीवन में गहरा और महत्वपूर्ण असर डालता है।

डॉ. दिव्या ज्योति को एक प्रगतिशील शिक्षाविद् और सामाजिक सुधारक के रूप में व्यापक रूप से जाना जाता है। उनके नेतृत्व और सहयोग से चाणक्य फाउंडेशन ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन और डॉ. अशोक गगन कॉलेज नाम से इनके अधीन 30 से अधिक तकनीकी शिक्षण संस्थान संचालित हैं, जिनके माध्यम से हजारों छात्र-छात्राओं को आर्थिक बाधारहित उत्कृष्ट और कौशल‑आधारित रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान की जा रही है।वर्तमान में चाणक्य फाउंडेशन के संस्थानों में 1200 से अधिक छात्र-छात्राएँ नि:शुल्क तकनीकी शिक्षा भी प्राप्त कर रहे हैं, जिससे आर्थिक रूप से असहाय छात्रों को नई दिशा मिल रही है। उनका मॉडल वित्तीय बाधाओं को हटाकर कम लागत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर ग़रीब छात्रों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराता है।

डॉ. दिव्या ज्योति ने बिहार ऐसे राज्य में, जहाँ आज भी लड़कियों की शिक्षा राष्ट्रीय मानक से काफ़ी कम है, को रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलव्ध कराने के लिए असाधारण कार्य किए हैं । उन्होंने कई स्कॉलरशिप, मेन्टरशिप कार्यक्रम और जागरूकता अभियानों के माध्यम से सामाजिक बाधाओं को चुनौती दी है और परिवारों को अपनी बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया है।  औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ, उन्होंने कौशल विकास पहल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न कौशल विकास निगमों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सहयोग से उन्होंने सैकड़ों वंचित और हाशिए पर खड़े बच्चों को रोजगारोन्मुख व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ी है और उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन मिला है। डॉ. दिव्या ज्योति महिला शिक्षाविदों के अधिकारों की भी मुखर वकालत करती हैं। उन्होंने कार्यस्थल की गरिमा, समान अवसर, पेशेवर मान्यता और महिलाओं के लिए नीतिगत समर्थन जैसे मुद्दों पर आवाज़ उठाई है, जिससे कई महिला शिक्षकों को नेतृत्व के पदों पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।

पुरस्कार समारोह में उन्होंने अपने छात्रों, शिक्षकों और सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय पुरस्कार केवल उनका व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि एक समान और समावेशी शिक्षा प्रणाली के निर्माण में सामूहिक प्रयासों की मान्यता है। उन्होंने पुनः कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन है और वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को जन-जन तक विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रतिभा सम्मान समारोह‑2026 में उपस्थित प्रमुख शिक्षाविद्, नीति निर्माता और सामाजिक नेताओं ने डॉ. दिव्या ज्योति के कार्य को सराहते हुए उन्हें सामाजिक उत्तरदायित्व वाले नेतृत्व का आदर्श बताया। कई वक्ताओं ने उनके शैक्षणिक दृष्टि और ग्राउंड‑लेवल कार्य को उजागर किया, जिससे हजारों छात्रों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन आया है। डॉ. दिव्या ज्योति की पहल न केवल शिक्षा बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, अनुशासन और नागरिक जागरूकता को भी पोषित करती हैं। प्रतिभा सम्मान समारोह‑2026 में प्राप्त यह राष्ट्रीय पुरस्कार उनके योगदान को और अधिक सुदृढ़ बनाता है, जिससे वे भारत के शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक प्रमुख शख्सियत के रूप में स्थापित हुई हैं। उनका कार्य यह दर्शाता है कि दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर प्रयास शिक्षा को समानता, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय प्रगति का साधन बना सकते हैं।

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