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एक पिता की यह इमोशनल कहानी जो आपका दिल छू जाएगी !
धर्म

“एक पिता की भावनात्मक कहानी: बेटे के दिल तक पहुँचने की कोशिश”

“बुजुर्ग पिता की सोशल मीडिया यात्रा: अकेलेपन से जुड़ने की कहानी”

“पिता की सोशल मीडिया प्रेम कहानी: अकेलेपन से स्नेह तक का सफर”

“एक वृद्ध पिता की दर्द भरी कोशिश: सोशल मीडिया के जरिए बेटे का दिल जीतने की कहानी”

यह कहानी है जय नारायण नाम के आदमी की जो रिटायर हो गए थे और कुछ सालों पहले उनकी पत्नी का बीमारी के कारण निधन हो गया था। घर में वह और उनका बेटा मुरली रहते थे। मुरली एक अच्छी कंपनी में काम करता था। जय नारायण जी अपने आप को बहुत अकेला महसूस करते थे। यह अकेलापन यूं ही नहीं था;

वह दिन भर घर में अकेले रहते थे और जब शाम को बेटा काम से वापस लौटता, तब वह लैपटॉप और मोबाइल में लगा रहता। जय नारायण जी उससे बात करने के लिए और अपना मन हल्का करने के लिए तरस जाते। ऐसा काफी लंबे समय तक चलता रहा। जय नारायण जी ने सोचा कि अब उन्हें कुछ करना ही पड़ेगा।

उनके पास एक सिंपल कीपैड वाला फोन था, इसलिए उन्होंने एक नया एंड्राइड फोन ले लिया। इस फोन में उन्होंने अब सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करना है, यह सीखना शुरू कर दिया। शाम को जब बेटा काम से घर आया, तो उन्होंने उससे कहा, “बेटा, मुझे जरा सोशल मीडिया कैसे इस्तेमाल करते हैं, सिखा दोगे?”

मुरली उस रोज थोड़ा चिड़चिड़ा हुआ नजर आ रहा था। उसने अपने पिता से कहा, “मैं यहां इतना थक हार कर काम से लौटा हूं और आपको कुछ नया सीखना है। मेरे बारे में नहीं सोचते कि मैं थोड़ा आराम कर लूं?”

जय नारायण जी अपने बेटे की बातें सुनते रहे और कुछ ना बोल पाए। उन्होंने अंदर से बहुत बुरा महसूस किया, लेकिन वह अपने आंसू रोके रहे। अगले दिन सुबह जय नारायण जी ने अपने बेटे के लिए उसके मनपसंद नाश्ता बनाया। नाश्ता करते हुए बेटे को अच्छा लग रहा था, इसलिए जय नारायण जी ने फिर से कहा, “बेटा, मैंने सोशल मीडिया पर अकाउंट तो पड़ोसी के लड़के से बनवा लिया है। अब तू मुझे बता दे कि इस पर पोस्ट कैसे करते हैं।”

अपने पिता की बातें सुनकर इस बार मुरली जोर-जोर से हंसने लगा और कहने लगा, “क्या पापा, आप भी इस उम्र में कहां सोशल मीडिया के चक्कर में पड़ रहे हो? आप धार्मिक किताबें पढ़ो, भगवान का नाम लो।” इतना कहकर मुरली ने अपना नाश्ता खत्म किया और अपने काम के लिए निकल गया।

जय नारायण जी ने उसके बाद भी एक-दो बार अपने बेटे से सोशल मीडिया सिखाने के लिए कहा, लेकिन उसने अपने पिता की बात पर ध्यान नहीं दिया। एक दिन रात को मुरली पानी पीने के लिए उठा, तो उसने देखा कि उसके पापा के कमरे की लाइट चालू है। उसे थोड़ी चिंता हुई, इसलिए उसने खिड़की से झांक कर देखा तो उसके पापा मोबाइल पर सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट कर रहे थे। वह वहां से अपने कमरे में चला गया और सो गया।

मुरली जब सुबह जागा, तो उसने अपना सोशल मीडिया चेक किया और वहां उसके पापा की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने के बाद जब मुरली ने अपने पापा का अकाउंट चेक किया, तो उसने देखा कि सबसे पहली पोस्ट में उसी के बचपन की फोटो थी और लिखा था, “हैप्पी बर्थडे बेटा।” मुरली को अब समझ में आ चुका था कि क्यों उसके पापा सोशल मीडिया सिखाने के लिए इतने पीछे पड़े हुए थे और क्यों यह काम उनके लिए इतना जरूरी था। उसकी आंखें नम हो गईं। वह सीधा अपने पापा के कमरे में गया और उनके गले लगकर उनसे माफी मांगने लगा।

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