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सपनों की दुनिया और वास्तविकता

रीमा ने आंखें खोली और अचानक ही सोने की देर से उठने की हड़बड़ी महसूस की। वह पिछले कई सालों से इतनी देर तक नहीं सोई थी, लेकिन आज सब कुछ बदल गया था। उसकी सुबह की भागदौड़ शुरू हो चुकी थी – बिंदीया स्कूल गई थी, मोहित ऑफिस के लिए लेट हो रहा था, और मां जी की चिढ़ की आशंका ने उसे परेशान कर दिया था।

जब रीमा ने देखा कि पापा जी के लिए इडली वडे तैयार किए गए हैं, तो उसकी चिंता और बढ़ गई। वह बड़बड़ाते हुए बाहर आई और पाया कि मां जी ने सब कुछ संभाल लिया था। मां जी ने चाय बनाई, पापा जी को सांभर-चटनी दी, और रीमा को आराम करने की सलाह दी। मां जी की यह दरियादिली देखकर रीमा को आश्चर्य हुआ, और फिर बिंदीया की स्कूल की बातें भी सुनने को मिलीं।

नाश्ते के बाद, रीमा को दिन की कुछ खुशियाँ मिलीं। उसके दोस्तों ने उसका जन्मदिन मनाया, और वह अपने परिवार की ओर से मिले सरप्राइज से अभिभूत हो गई। मोहित ने उसे खूबसूरत हीरो का हार गिफ्ट किया, और बिंदीया ने अपनी छोटी सेविंग्स से एक टेडी बियर खरीदी थी। मां जी और पापा जी ने कश्मीर की ट्रिप का टिकेट भी उसे दिया, जिसे देख कर रीमा की आँखें खुशी के आँसुओं से भर गईं।

जैसे ही उसने यह सब देखा, वह एक शानदार दिन की कल्पना करने लगी। उसे यह सब इतना सुंदर और परफेक्ट लग रहा था कि उसे यकीन ही नहीं हुआ कि सब एक सपना था। अचानक बेल की आवाज आई, और रीमा की आंखें खुल गईं। वह अपने बिस्तर पर पड़ी हुई थी और देखती है कि सब कुछ वैसा ही है जैसा कि रोज़ होता है। मां जी की रोज की कटकट चालू थी, और रीमा को यह एहसास हुआ कि सब कुछ एक सपना था।

फिर भी, उस सपने की मिठास और खुशनुमा पल उसके दिल में जिंदा थे। उसने कश्मीर के सपने को सच होने की उम्मीद में दिन भर काम किया। वह जानती थी कि उसकी जिंदगी की कठिनाइयों के बावजूद, यह एक सपना उसे हमेशा खुश रहने की प्रेरणा देगा।

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