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The fight was resolved with understanding and love: The story of a sister-in-law
लाइफस्टाइल

समझदारी और प्यार से सुलझी झगड़े की बात: देवरानी-जेठानी की कहानी

एक संयुक्त सुखी परिवार था। संयुक्त होते हुए भी सुखी इसलिए क्योंकि इस परिवार के दोनों भाइयों की पत्नियां यानी की देवरानी और जेठानी आपस में बड़े प्यार से रहती थीं।
लेकिन जैसे समंदर में ज्वार भाटा आते हैं, उनके संबंधों में भी समय के साथ उतार-चढ़ाव आने लगे। और एक दिन एक बड़ी सुनामी जैसा झगड़ा दोनों देवरानी जेठानी में हुआ। इस झगड़े पर विराम तब लगा जब दोनों ने एक दूसरे का मुंह कभी ना देखने की कसमें खाई। दोनों अपने-अपने कमरों में चली गईं और दरवाजा बंद कर लिया।
आधे घंटे बाद जेठानी के दरवाजे पर दस्तक हुई। जेठानी ने ऊंची आवाज में पूछा: कौन है? बाहर से आवाज आई: दीदी मैं हूं, दरवाजा खोलो! जेठानी ने जोर से दरवाजा खोला और गुस्से से बोली: अभी तो मेरा मुंह ना देखने की कसमें खाकर गई थी, अब क्या हो गया?
देवरानी बोली: हां कसम तो खाई थी, लेकिन अपने कमरे में गई तो मां की एक बात याद आई, जब भी किसी बड़े के साथ अनबन हो तो उनके अच्छे काम और स्वभाव के बारे में सोचना। मैंने आपकी अच्छाइयों के बारे में सोचा तो मुझे सिर्फ आपके द्वारा मुझे मिला प्यार ही प्यार याद आया और मैं आपके लिए चाय बनाकर आ गई!
फिर क्या था, जेठानी ने रोते हुए अपनी देवरानी को गले से लगा लिया। दोनों ने एक साथ बैठकर आराम से, प्यार से चाय पी!
संसार का नियम है कि गुस्से से गुस्सा कभी शांत नहीं होता, समझदारी से होता है। आग से आग नहीं बुझती, पानी से बुझती है। समझदार इंसान बड़ी से बड़ी बिगड़ी बात को प्यार के दो शब्द बोलकर संभाल लेता है। हर स्थिति में संयम और बड़ा दिल रखना ही समझदारी है।

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