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मोरारी बापू ने मोरबी रामकथा का समापन किया, दिलों में सकारात्मक परिवर्तन पर प्रकाश डाला

मोरारी बापू ने स्पष्ट किया कि मोरबी ब्रिज मामले में कोर्ट का आदेश ही सर्वोपरी, आरोपियों को क्षमा करने की वकालत नहीं की

तलगाजार्डा (गुजरात) [भारत], 10 अक्टूबर: पिछले साल मोरबी पुल त्रासदी में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए पूज्य मोरारी बापू की मोरबी में आयोजित रामकथा ने रविवार को विराम लिया। रामकथा के दौरान पूज्य बापू, सांसद मोहनभाई कुंडारिया और कबीर बापू श्री शिवराम बापू ने पुल दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिवारों से मुलाकात की।

पूज्य मोरारी बापू ने रामकथा के मंच से स्पष्ट किया कि उनसे मिलने वाले कुछ पीड़ितों के परिवार के सदस्यों ने पुल ढहने के बाद जेल में बंद लोगों के प्रति क्षमा की भावना व्यक्त की। पूज्य बापू ने यह भी कहा कि चूँकि मामला कोर्ट में है इसलिए इस बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं है लेकिन रामकथा का प्रभाव दूरगामी है और यह लोगों की सोच बदल देती है। यहाँ यह स्पष्ट किया जाता है कि पूज्य बापू ने जेल में बंद लोगों की रिहाई का बिलकुल भी अनुरोध नहीं किया है। साथ दिया गया वीडियो इस बात की पुष्टि करता है। पूज्य बापू ने रामकथा के समापन में यही कहा कि रामकथा लोगों का हृदय परिवर्तन कर देती है।

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