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महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की सलाहकार बनीं

नई दिल्ली, अक्टूबर 9: भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित मंच दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DPIFF) ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि बड़ौदा की महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ अब फेस्टिवल के सलाहकार बोर्ड से जुड़ गई हैं।

इस जुड़ाव के साथ भारतीय फिल्म फेस्टिवल जगत में शाही विरासत और सांस्कृतिक दृष्टि का नया अध्याय जुड़ गया है। राधिकाराजे गायकवाड़ की उपस्थिति न केवल फेस्टिवल की गरिमा को और ऊँचाई देगी, बल्कि भारत की कला, संस्कृति और सिनेमा को विश्व पटल पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करने में योगदान देगी।

दादासाहेब फाल्के जी की विरासत से प्रेरित DPIFF वर्षों से भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े नामों और उभरते प्रतिभाशाली कलाकारों को सम्मानित करता आ रहा है। फेस्टिवल के सलाहकार बोर्ड में पहले से कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल हैं —

Col. P. C. Sood – Vice President of Hinduja Group,
Dattaraj Salgaocar – Chairman of V. M. Salgaocar Corporation,
Bhavna Merchant – Esteemed Cultural Expert & Former Censor Board Jury, Ministry of Information & Broadcasting,
Mayank Shroff – Head of Film Programming & Distribution, Cinépolis India, और
Jyoti Badheka – Creative Producer & Former Censor Board Jury, Ministry of Information & Broadcasting, Government of India.

इस अवसर पर DPIFF के CEO अभिषेक मिश्रा ने कहा,
“हमें महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ का स्वागत करते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है। भारतीय संस्कृति और धरोहर के संरक्षण के प्रति उनका समर्पण प्रेरणादायक है। उनके अनुभव और दृष्टिकोण से फेस्टिवल को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।”
लक्ष्मी विलास पैलेस, बड़ौदा की संरक्षक के रूप में महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ भारतीय शाही इतिहास और कला जगत की एक प्रमुख हस्ती हैं। उन्होंने वर्षों से भारतीय विरासत, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले अनेक सामाजिक एवं सांस्कृतिक अभियानों का नेतृत्व किया है। DPIFF से उनका जुड़ाव भारतीय सिनेमा और संस्कृति के संगम को एक नए स्तर पर ले जाएगा।

अपने जुड़ाव पर महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ ने कहा,
“दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के सलाहकार बोर्ड से जुड़ना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं DPIFF की उस प्रतिबद्धता की प्रशंसा करती हूं, जो सिनेमा की उत्कृष्टता को पहचान देती है और हमारी सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर बढ़ावा देती है।”

वर्षों से DPIFF ने भारत के 15 से अधिक राज्यों की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हुए पर्यटन मंत्रालय के ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ और संस्कृति मंत्रालय के ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ जैसे अभियानों को सशक्त समर्थन दिया है। फेस्टिवल अब एक वैश्विक सांस्कृतिक शक्ति के रूप में उभर चुका है, जो भारतीय सिनेमा की प्रतिष्ठा को नए आयाम दे रहा है।

महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ का जुड़ाव DPIFF के लिए केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विरासत का प्रतीक है — एक ऐसा संगम जहां राजसी गरिमा, सांस्कृतिक नेतृत्व और सिनेमाई उत्कृष्टता साथ मिलकर भारतीय सिनेमा का स्वर्णिम अध्याय रच रहे हैं।
दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DPIFF) के बारे में:
दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल भारत का सबसे प्रतिष्ठित… (पाठ आगे जैसा है)।

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