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"माता-पिता का बलिदान और बेटे की अनमोल यादें"
लाइफस्टाइल

“पिता का त्याग और बेटे की दगाबाजी: एक भावुक कहानी”

पत्नी से वादा किया था कि बेटे को माता और पिता दोनों का प्यार दूंगा, उसका खूब ख्याल रखूंगा, और किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। पत्नी का वादा भी निभाना था।

एक भावुक पिता ने लिखी है: हर मां बाप के दुख की कहानी 😭👇बेटा कुछ ही सालों का था कि कैंसर के कारण पत्नी का देहांत हो गया। लोगों ने बहुत समझाया कि बच्चा छोटा है, दूसरी शादी कर लो। तुम्हें भी जीवनसाथी मिल जाएगा और बच्चे को मां भी मिल जाएगी। लेकिन वह सोचने लगा कि क्या सौतेली मां मेरे बेटे को अपना बच्चा समझकर प्यार दे पाएगी। वह मेरे लिए तो अच्छी जीवनसाथी बनेगी, लेकिन क्या मेरे बच्चे के लिए मां बन पाएगी?

समय बीतता गया। फिर एक दिन बेटे ने हाथ में दो रोटियां और दो जोड़ी कपड़े लेकर घर से बाहर निकाल दिया। बेटे की आंखों में मजबूरी साफ नजर आ रही थी। बहू ने कहा था कि अब इस घर में या तो तुम्हारे पिताजी रहेंगे या मैं और बच्चे। अब मुझे तुम्हारे बूढ़े पिता की सेवा नहीं करनी, मेरा अपना भी जीवन है। तुम्हारे पिताजी के कारण मेरा घर से बाहर जाना मुश्किल हो गया है। अंततः बेटे की खुशी के लिए उसने अपना घर छोड़ दिया, जिसे उसने और पत्नी ने प्यार और मेहनत से सजाया था। सोचा था कि अब अपना बुढ़ापा पोते-पोतियों के साथ खुशी-खुशी इसी घर में बिताएंगे।

घर से बाहर निकलते ही उसने देखा कि कुछ ही दूरी पर एक कुत्ता भूख से भौंक रहा था। उसने रोटियां उसके सामने डाल दीं। कुत्ता रोटियां खा रहा था और उसकी आंखों से कृतज्ञता झलक रही थी। दो दिन बाद, आश्रम में बैठे-बैठे पिता के मन में कई सवाल उठ रहे थे। क्या मेरे बेटे को मेरी याद आएगी? क्या वह मुझे वापस लेने आएगा? क्या वह अपनी पत्नी को मेरी वापसी के लिए मनाएगा? क्या वह मेरे त्याग को याद करेगा?

यह सब सोचते-सोचते किसी ने बताया कि आपसे मिलने कोई आया है। खुशी की इंतजार में वह दरवाजे की ओर दौड़ा। दरवाजे तक जाकर देखा कि वही कुत्ता, जुबान बाहर निकालकर और अपनी पूंछ हिला रहा था, उसे देखकर आश्चर्यचकित हो गया। कितना शर्म की बात है कि एक छोटा सा जानवर बूढ़े आदमी द्वारा किए गए एहसान को याद रखकर मिलने आया, जबकि बच्चे अपने माता-पिता द्वारा किए गए त्याग को भूल जाते हैं। 🥹🙏🏿

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