विकास सप्ताह समारोह-2024: सूरत में आकर्षक दीवार पेंटिंग्स का प्रदर्शन सूरत: विकास सप्ताह-2024 समारोह के तहत सुमुल डेयरी रोड से सूरत रेलवे स्टेशन तक विभिन्न...
हजीरा-सूरत, अक्टूबर 11, 2024: आर्सेलरमित्तल निप्पोन स्टील इंडिया (AM/NS India) ने गुरुवार को अपने CSR प्रोजेक्ट “डिजिटल पाठशाला” के तहत कवास गांव के सरकारी प्राथमिक...
मेरठ, सितम्बर 19 : अनेक विशेषताओं से युक्त सर्वश्रेष्ठ परीक्षा मार्गदर्शक, इसका कोई विकल्प नहीं 100% सफलता के लिए परीक्षार्थी Vidya Question Bank-2025 से करें...
नई दिल्ली, सितम्बर 20: भारत में छात्र आत्महत्या के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। जितने भारत में टॉपर्स निकल रहे हैं, उससे 10 गुना ज्यादा बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। सिर्फ 10वीं-12वीं या कॉलेज के बच्चों के ही नहीं, बल्कि इससे भी ज्यादा कक्षा 4 से लेकर कक्षा 9 तक के बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। इसका जिम्मेदार कौन है? माता-पिता, स्कूल या खुद बच्चे? इसी विषय पर हमारी बातचीत BIYZEN Youth Services के डायरेक्टर श्री अमनदीप से हुई।अमनदीप ने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से समझाया।उन्होंने बताया कि भारत आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, और इस बदलाव के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। हर इंसान को तनाव का सामना करना पड़ता है, चाहे वह 8 साल का बच्चा हो या 60 साल का वयस्क। पिछले दो दशकों में मानसिक सहनशीलता की कमी के कारण कई बदलाव हुए हैं, जिससे तनाव और आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। BIYZEN Youth Services हजारों बच्चों को आत्महत्या से बचा चुका है और उन्हें अपनी सेवाएं प्रदान कर चुका है। उनकी Stress Reliever Shield बच्चों को तनाव और आत्महत्या से बचाती है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन के मूल्यों को समझना आसान हो जाता है। अमनदीप ने बताया कि जब वह किसी मातापिता से बात करते हैं, तो सभी यही कहते हैं कि “हमारे बच्चों को किसी प्रकार का तनाव नहीं है।” लेकिन जब उन्हें यह बताया जाता है कि जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके माता पिता का भी यही जवाब था, तब उन्हें समझ आता है कि किसी की मानसिक स्थिति को बिना काउंसलिंग के समझा नहीं जा सकता, क्योंकि तनाव बताकर नहीं आता। स्कूलों में इस सेवा को देने पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलती हैं। अमनदीप ने बताया कि जब वह स्कूलों में जाकर अपनी सेवाएं बच्चों को देने की कोशिश करते हैं, तो कुछ स्कूल इसे मुफ्त में भी बच्चों तक नहीं पहुँचने देते। दुःख की बात तो यह है कि जिन स्कूलों के बच्चे आत्महत्या कर चुके होते हैं, वे भी माता-पिता को दोषी ठहराकर बच्चों तक यह सेवा नहीं पहुँचने देते। कुछ स्कूल इस सेवा का शुल्क बहुत अधिक बताकर मना कर देते हैं, तो कुछ यह कहकर मना करते हैं कि “हमारे बच्चों को इसकी जरूरत नहीं है, बाद में आना।” हालांकि, कई अच्छे स्कूल अपने बच्चों को यह सेवा देने के लिए खुद हमें बुलाते हैं और पूरा सहयोग करते हैं, क्योंकि उनके लिए बच्चों की ज़िंदगी सबसे ज़रूरी होती है। अमनदीप ने बताया कि कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक हर बच्चे को तनाव-राहत काउंसलिंग मिलनी चाहिए, ताकि बच्चों में सकारात्मकता लाई जा सके और जब भी नकारात्मकता या तनाव आए, उसे तुरंत दूर किया जा सके। सिर्फ स्कूल में काउंसलर उपलब्ध होना काफी नहीं है, 24×7 सपोर्ट भी जरूरी है। कई स्कूल और माता-पिता अब इसे समझ रहे हैं, और कई स्कूल व माता-पिता अपने बच्चों को खोने के बाद इसे समझ रहे हैं। BIYZEN Youth...
सूरत-हजीरा, अगस्त 16, 2024: AMNS इंटरनेशनल स्कूल ने बहु-विषयक शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति का जश्न मनाने वाली एक प्रदर्शनी ‘लर्निंग कॉन्फ्लुएंस’ की मेजबानी की। अगस्त...