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सीए अभय भुतडा
बिज़नेस

केंद्रीय बजट २०२६: अर्थव्यवस्था की मुख्य प्राथमिकताओं के बारे में सीए अभय भुतडा के विचार

मुंबई (महाराष्ट्र), फरवरी 03: माननीय वित्त मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट २०२६-२७ पेश किए जाने के बाद, जाने-माने उद्यमी, समाजसेवी, तथा अभय भुतडा फाउंडेशन और टैब ग्लोबल वेंचर्स के अध्यक्ष, सीए अभय भुतडा ने बजट की प्राथमिकताओं के बारे में अपने विचार व्यक्त किए।

कर्तव्य भवन में तैयार किया गया इस बार का केंद्रीय बजट मुख्य रूप से तीन कर्तव्यों पर आधारित है: आर्थिक विकास की रफ़्तार को बढ़ाना और उसे बनाए रखना, लोगों की क्षमता और उनकी उम्मीदों को बढ़ाना, और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण के अनुरूप हर तबके के लोगों को समान रूप से आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना।

बैंकिंग, एनबीएफसी में सुधार और टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाना
अभय भुतडा के अनुसार विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव बिल्कुल सही समय पर लाया गया, और इस सुधार के बाद विकास के अगले चरण के लिए इस क्षेत्र की तैयारियों की समीक्षा की जा सकेगी। उन्होंने पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कॉरपोरेशन के पुनर्गठन का भी जिक्र करते हुए बताया कि, यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी के विस्तार, उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने और लंबे समय में इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।

सीए अभय भुतडा ने कहा, “समय के साथ क्रेडिट की मांग बढ़ रही है, जिसे देखते हुए वित्तीय व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए स्थिरता, सबको साथ लेकर चलना और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है।”

टैक्स के बारे में बताते हुए, भुतडा ने कहा कि नया आयकर अधिनियम अप्रैल २०२६ से लागू हो जाएगा। उनके अनुसार, टीडीएस और टीसीएस के नियमों को आसान बनाने और रिटर्न में सुधार के लिए समय-सीमा बढ़ाने से नियमों का पालन करने में आने वाली परेशानियों और मुकदमों में कमी आएगी, जिससे लोगों के लिए कारोबार करना आसान हो जाएगा।

एमएसएमई के लिए सहायता और पूंजी की उपलब्धता
चार्टर्ड अकाउंटेंट अभय भुतडा ने आगे कहा कि, ₹१०,००० करोड़ की एसएमई विकास निधि की स्थापना, दरअसल उन्हें “चैंपियन एसएमई” बनाने के लक्ष्य के साथ उठाया गया एक बड़ा कदम है, जिसके तहत उन्हें प्रदर्शन के निर्धारित मानदंडों के अनुरूप विकास के चरण में पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत निधि के लिए ₹२,००० करोड़ के अतिरिक्त आवंटन का भी उल्लेख किया, जिससे छोटे-छोटे उद्यमों के लिए पूंजी की लगातार उपलब्धता आसान बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि, विशेष रूप से टियर II और टियर III श्रेणी के शहरों में “कॉर्पोरेट मित्रों” के लिए कम समय के प्रायोगिक कार्यक्रम तैयार करने में ICAI, ICSI और ICMAI जैसे पेशेवर निकायों की भागीदारी से, छोटे व्यवसायों के बीच वित्तीय अनुशासन, नियमों के पालन और बेहतर गवर्नेंस को बढ़ावा मिल सकता है।

टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और अंतर्राष्ट्रीय निवेश
टेक्नोलॉजी की बात की जाए, तो अभय भुतडा के मुताबिक मौजूदा बजट से साफ़ जाहिर है कि भारत अब ग्लोबल डेटा और डिजिटल सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनने के लिए तैयार है। भारतीय डेटा सेंटर्स का उपयोग करने वाले विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए टैक्स में छूट के साथ-साथ सेफ हार्बर नियमों को आसान बनाने और आईटी सेवाओं के लिए स्वचालित मंजूरी से लंबे समय के निवेश और निर्यात के लिए माहौल और अधिक सुरक्षित बन गया है।

अंत में उन्होंने कहा कि वर्ष २०२६-२७ का बजट आर्थिक और टेक्नोलॉजी क्षेत्र के लिए एक मजबूत रूपरेखा पेश करता है, साथ ही विकसित भारत के दृष्टिकोण के तहत स्थायी विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नियामक और पूंजी आवंटन में किए गए सुधारों को अनुशासित तरीके से लागू करना सबसे ज्यादा मायने रखेगा।

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