सूरत: सूरत शहर का ‘इलेक्ट्रिक सिटी’ बनने का सपना और इसके लिए उठाए गए कदम वास्तव में प्रेरणादायक हैं। नगर पालिका ने 2030 तक विभिन्न सेवाओं में खपत होने वाली बिजली का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादित करने का निर्णय लिया है। यह न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह शहर के नागरिकों के लिए भी ऊर्जा की लागत में कमी लाने का एक महत्वपूर्ण उपाय है।
अल्थान डिपो में स्थापित होने वाला पहला सौर संयंत्र 600 ई-बसों के चार्जिंग के लिए ऊर्जा प्रदान करेगा। इस संयंत्र की स्थापना बीआरटीएस जीआईजेड (जर्मनी) के सहयोग से की जाएगी, और इसकी सभी लागतें GIZ ‘सेव एनवायरनमेंट’ के फंड से पूरी की जाएंगी। यह पहल सूरत नगर पालिका पर कोई आर्थिक बोझ नहीं डालती, जो कि एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
वर्तमान में, सूरत नगर पालिका ने बिजली व्यय में 28 प्रतिशत की राहत हासिल की है, जो एक सकारात्मक संकेत है। शहर की ऊर्जा दक्षता सेल ने 39 मेगावाट पवन ऊर्जा, 10 मेगावाट सौर ऊर्जा और विभिन्न नगर निगम कार्यालयों में 9 मेगावाट छत के साथ मिलकर कुल 58 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन किया है। इससे नगर पालिका के कुल विद्युत लागत का 28 प्रतिशत ऊर्जा स्वयं उत्पन्न कर रही है, जिससे महत्वपूर्ण बचत हो रही है।
सूरत में सोलर रूफ टॉप योजना के तहत 17,842 घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। इससे न केवल शहर की ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिल रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों को भी नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह पहल दर्शाती है कि सूरत धीरे-धीरे बिजली उपभोक्ताओं से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों की दिशा में प्रगति कर रहा है।
इस प्रकार, सूरत शहर का यह प्रयास न केवल एक स्थायी भविष्य की ओर बढ़ने का संकेत है, बल्कि अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत है। जब अन्य नगरपालिकाएँ भी इसी प्रकार के प्रयास करेंगी, तब न केवल पर्यावरण में सुधार होगा, बल्कि आर्थिक स्थिरता भी प्राप्त होगी।