छत्तीसगढ़ की बेटियों के लिए स्कूल की दूरी अब पढ़ाई छोड़ने की वजह नहीं बन रही है। कक्षा 9वीं की पात्र छात्राओं को निःशुल्क साइकिल उपलब्ध कराने वालीसरस्वती साइकिल योजनाके तहत पिछले दो वर्षों में3.30 लाख से अधिक बालिकाओंको लाभ मिला है। स्कूल आने-जाने के लिए कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने वालीछात्राओं के लिए साइकिल ने समय और परेशानी दोनों बचाई है। खासकर ग्रामीण, आदिवासी तथा दूरस्थ इलाकों की लड़कियों की नियमित पढ़ाई के लिए इस योजना ने एक बड़ी बाधा को कम किया है। उनके लिए नियमित स्कूल पहुंचना आसान हो गया है।
इस योजना का उद्देश्य सरकारी और अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल श्रेणी की पात्र छात्राओं को विद्यालय आने-जाने की सुविधा उपलब्ध कराना और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।इस योजना का असर उन इलाकों में अधिक दिखाई दे रहा है जहां गांवों और स्कूलों के बीच दूरी अधिक है और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा सीमित है। कई छात्राएं रोज 3 से 5 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पैदल तय कर स्कूल पहुंचती थीं। साइकिल ने उनके लिए इस दूरी को समय और मेहनत के लिहाज से काफी आसान कर दिया है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सारंगढ़ स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 150 छात्राओं को साइकिल वितरित की गई। इनमें कक्षा 9वीं की छात्रा छोटी यादव भी शामिल है।झरपडीह गांव से स्कूल की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। छोटी को अब तक यह दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। गर्मी में तेज धूप और बारिश के मौसम में रास्ते की मुश्किलें उसकी रोजमर्रा की पढ़ाई का हिस्सा थीं। साइकिल मिलने के बाद उसके लिए स्कूल आने-जाने का समय और शारीरिक मेहनत दोनों कम हुए हैं।
ग्राम बासीनबहरा की आकांक्षा रात्रे और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली दीक्षा सिदार जैसी छात्राओं के लिए भी साइकिल ने आवागमन को आसान बनाया है। ऐसे परिवारों के लिए यह सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निजी तौर पर साइकिल खरीदने का अतिरिक्त खर्च उठाना हमेशा संभव नहीं होता।
दंतेवाड़ा से बालोद तक असर
योजना का दायरा केवल मैदानी या अपेक्षाकृत विकसित इलाकों तक सीमित नहीं है। कभी नक्सल प्रभावित रहे दंतेवाड़ा जिले के कन्या हाई स्कूल पोटाकेबिन चितालूर की54 छात्राओंको भी चालू सत्र में सरस्वती साइकिल योजना के तहत साइकिलें मिली हैं।इसी तरह बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला अचौद की32छात्राओंको साइकिल वितरित की गई। इस विद्यालय में खुटेरी, फुंडा, बोरगहन और रजोली जैसे आसपास के गांवों से छात्राएं पढ़ने आती हैं। ऐसे में साइकिल उनके लिए स्कूल तक पहुंचने का नियमित साधन बन रही है।
दंतेवाड़ा के जावंगा स्थित एजुकेशन सिटी ऑडिटोरियम में शाला प्रवेश उत्सव के दौरान आसपास के विद्यालयों की कक्षा 9वीं की 256 छात्राओंको भी निःशुल्क साइकिलें दी गईं।
सरगुजा संभाग के बलरामपुर शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की 120 छात्राओं को भी 4 अगस्त को साइकिल वितरित की गई। ग्राम ओबरी की छात्रा राधिका के लिए यह सुविधा खास तौर पर महत्वपूर्ण है। उसके मुताबिक, पहले उसे रोज करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता था और बारिश के दौरान यह सफर और मुश्किल हो जाता था। साइकिल मिलने के बाद अब वह समय पर स्कूल पहुंच पा रही है।
लड़कियों की शिक्षा में स्कूल तक पहुंच एक बुनियादी जरूरत है। खासकर ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में जहां परिवहन के सीमित विकल्प हैं, वहां घर और स्कूल के बीच की दूरी कई बार नियमित उपस्थिति में बाधा बनती है।सरस्वती साइकिल योजना इसी चुनौती का समाधान करने में मददगार है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों की ये तस्वीरें एक व्यापक बदलाव की ओर इशारा करती हैं। जब स्कूल तक पहुंचने का रास्ता आसान होता है, तो बेटियों के लिए पढ़ाई जारी रखना भी आसान हो जाता है।
