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How Rural Chatore is becoming a trusted Indian food brand by combining traditional flavors, quality, and women's employment.
बिज़नेस

ग्रामीण चटोर कैसे पारंपरिक स्वाद, गुणवत्ता और महिला रोज़गार को जोड़कर एक भरोसेमंद भारतीय फूड ब्रांड बन रहा है

भारत में उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है। लोग अब सिर्फ अच्छा स्वाद ही नहीं, बल्कि शुद्धता, भरोसा और उत्पाद के पीछे की कहानी भी जानना चाहते हैं। ऐसे समय में ग्रामीण चटोर एक ऐसा ब्रांड बनकर उभरा है जो पारंपरिक भारतीय स्वाद को आधुनिक उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं से जोड़ रहा है।

राजेश गुप्ता द्वारा शुरू किया गया ग्रामीण चटोर मिथिला क्षेत्र की पारंपरिक खाद्य संस्कृति से प्रेरित है। इस ब्रांड का उद्देश्य केवल बाजार में जगह बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे उत्पाद देना है जिन पर लोग लंबे समय तक भरोसा कर सकें।

गुणवत्ता पर आधारित कार्यप्रणाली

ग्रामीण चटोर में उत्पादों की तैयारी केवल स्वाद तक सीमित नहीं रहती। कच्चे माल के चयन से लेकर अंतिम पैकेजिंग तक हर चरण पर गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है। पारंपरिक रेसिपी के साथ साथ स्वच्छता और सही प्रक्रियाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है।

यही कारण है कि उपभोक्ताओं को यहां स्वाद के साथ एक स्थिर गुणवत्ता भी मिलती है। धीरे धीरे ग्रामीण चटोर उन लोगों की पसंद बन रहा है जो घर जैसा स्वाद चाहते हैं, लेकिन भरोसे के साथ।

वेबसाइट https://grameenchator.com/

महिलाओं की भागीदारी से मजबूत होती सप्लाई चेन

ग्रामीण चटोर की एक खास पहचान यह है कि इसकी उत्पादन प्रक्रिया में स्थानीय महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। वर्तमान में 25 से अधिक महिलाएँ इस ब्रांड से जुड़ी हुई हैं और अलग अलग स्तर पर काम कर रही हैं।

ये महिलाएँ केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच और दैनिक संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस व्यवस्था से एक ओर उत्पादों में निरंतरता बनी रहती है और दूसरी ओर महिलाओं को स्थायी आय का साधन मिलता है।

कई परिवारों के लिए यह आमदनी घर की मुख्य आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करने में मदद कर रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा के खर्चों में स्थिरता आई है।

स्थानीय रोजगार से राष्ट्रीय पहचान तक

ग्रामीण चटोर की सोच स्थानीय स्तर पर रोज़गार पैदा करके राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की है। यही कारण है कि ब्रांड अपने विस्तार की योजना भी इसी मॉडल पर बना रहा है।

आने वाले समय में कंपनी का लक्ष्य 100 से अधिक महिलाओं को रोज़गार देना है, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके और अधिक परिवारों तक आर्थिक अवसर पहुंचाया जा सके।

यह विस्तार किसी भी कीमत पर तेज़ी से बढ़ने के बजाय संतुलित और ज़िम्मेदार तरीके से करने पर जोर देता है।

हमारे बारे में https://grameenchator.com/about-us/

संस्थापक की स्पष्ट दृष्टि

राजेश गुप्ता मानते हैं कि एक मजबूत ब्रांड वही होता है जो अपने लोगों के साथ आगे बढ़े। उनके अनुसार व्यवसाय तभी टिकाऊ होता है जब वह अपने साथ जुड़े लोगों को स्थिरता और सम्मान दे।

वे कहते हैं,
“हमारा प्रयास है कि ग्रामीण चटोर से जुड़ने वाला हर व्यक्ति खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। जब महिलाएँ आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो उसका असर पूरे समाज पर दिखाई देता है।”

बदलती उपभोक्ता सोच में ग्रामीण चटोर की भूमिका

आज जब उपभोक्ता स्थानीय, प्रामाणिक और जिम्मेदार ब्रांड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं, ग्रामीण चटोर इस बदलाव का सही उदाहरण बन रहा है। यह ब्रांड दिखाता है कि पारंपरिक स्वाद और आधुनिक भरोसा एक साथ कैसे आगे बढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष

ग्रामीण चटोर केवल एक फूड ब्रांड नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रयास है जो स्वाद, गुणवत्ता और सामाजिक ज़िम्मेदारी को एक साथ जोड़ता है। यह पहल साबित करती है कि जब व्यवसाय को सही सोच और इंसानी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो वह न केवल बाजार में जगह बनाता है, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में भी सकारात्मक बदलाव लाता है।

इंस्टाग्राम https://www.instagram.com/grameenchator

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