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सूरत सिविल अस्पताल में किसान की जान बचाई: 15 लाख रुपये के इलाज के खर्च से मिली राहत, मां जमीन बेचने को थी तैयार
हेल्थ & ब्यूटी

सूरत में 15 लाख रुपये के इलाज से किसान की जान बचाई, मां ने जमीन बेचने की तैयारी कर ली थी, लेकिन सिविल अस्पताल में मुफ्त इलाज ने परिवार को राहत दी

सूरत: महाराष्ट्र के संभाजीनगर जिले के सोय गांव के 38 वर्षीय किसान अमोल बोरसे को एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आईं। हादसे में उनके हाथ, पैर और पसलियों की 15 से अधिक हड्डियां टूट गईं। बोरसे का परिवार खेती करके अपना गुजारा करता है, और इस गंभीर दुर्घटना ने पूरे परिवार को संकट में डाल दिया। उन्हें पहले महाराष्ट्र के जलगांव के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज का खर्च 15 लाख रुपये तक आंका गया। परिवार के पास इतनी बड़ी राशि नहीं थी, लेकिन उन्हें सूरत के न्यू सिविल अस्पताल में भेजा गया, जहां उनका नि:शुल्क इलाज किया गया।

डॉक्टरों की टीम ने किया जटिल ऑपरेशन

न्यू सिविल अस्पताल के सर्जरी और ऑर्थो विभाग की टीम ने अमोल बोरसे का जटिल ऑपरेशन किया। डॉक्टर तेजस पटेल की देखरेख में सबसे पहले उनकी पसलियों का ऑपरेशन किया गया, क्योंकि छाती में चोट के कारण उन्हें न्यूमोथोरैक्स की समस्या हो गई थी। पसलियों के टूटने से उनके फेफड़ों में रक्त जमा हो गया था, जिसे एक ट्यूब के माध्यम से निकाला गया। तीन दिन तक आईसीयू में रखने के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ। इसके बाद ऑर्थो विभाग की डॉक्टर बीना वैद्य और डॉक्टर मनीष पटेल की टीम ने उनके पैर की टूटी हड्डियों की सर्जरी की।

नर्सिंग स्टाफ और रक्तदान केंद्र का योगदान

इलाज के दौरान सिविल ब्लड बैंक और सूरत रक्तदान केंद्र से छह यूनिट रक्त की व्यवस्था की गई। नर्सिंग काउंसिल के उपाध्यक्ष इकबाल कड़ीवाला और नर्सिंग टीम ने भी इस जटिल ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई। पूरे 20 दिन तक चली इस प्रक्रिया के बाद अमोल को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया।

मां जमीन बेचने को थी तैयार, परिवार को मिली राहत

अमोल के इलाज का खर्च 15 लाख रुपये था, जो उनके परिवार के लिए असंभव था। अमोल की मां ने कहा कि अगर इलाज के लिए जमीन भी बेचनी पड़ी, तो वह तैयार थीं। लेकिन सूरत सिविल अस्पताल ने उन्हें मुफ्त इलाज प्रदान कर उनकी चिंता को खत्म कर दिया। परिवार के सदस्य दिवाकर चौधरी ने कहा कि अगर न्यू सिविल अस्पताल न होता, तो अमोल की जान बचाना मुश्किल था। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और गुजरात सरकार का आभार व्यक्त किया।

सामाजिक नेताओं ने भी की मदद

सामाजिक कार्यकर्ता रामचंद्र पाटील और उनकी पत्नी भाविनी ने भी परिवार की मदद की। उन्होंने अमोल के इलाज के लिए सूरत सिविल अस्पताल में भर्ती कराने का सुझाव दिया। दिवाकर चौधरी ने कहा, “सूरत के डॉक्टरों और प्रशासन ने हमारे परिवार को नई जिंदगी दी है।”

परिवार को आर्थिक संकट से बचाया

डॉक्टरों और अस्पताल के अथक प्रयासों ने न केवल अमोल को जीवनदान दिया, बल्कि उनके परिवार को भारी आर्थिक संकट से भी बचाया। अमोल अब ठीक होकर अपने परिवार के पास लौट चुके हैं। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की सेवाओं की अहमियत को फिर से उजागर किया है।

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