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72 शिक्षा बोर्ड का सच: भारत में कितने मान्यता प्राप्त और कितने विदेशी बोर्ड हैं? जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली: भारत की शिक्षा व्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी और विविध प्रणालियों में से एक है। अक्सर यह सवाल सामने आता है कि भारत में कुल कितने शिक्षा बोर्ड कार्यरत हैं, उनमें से कितनों को मान्यता प्राप्त है, कितने ओपन स्कूल बोर्ड हैं और कितने विदेशी शिक्षा बोर्ड भारत में संचालित हो रहे हैं। इंटरनेट पर “72 शिक्षा बोर्ड” जैसे दावे भी सामने आते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है—यह जानना विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों के लिए आवश्यक है।

भारत में शिक्षा बोर्डों की मुख्य श्रेणियाँ

भारत में शिक्षा बोर्डों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में समझा जा सकता है—

  1. नियमित (रेगुलर) शिक्षा बोर्ड
  2. मुक्त / ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड
  3. विदेशी शिक्षा बोर्ड

भारत के प्रमुख मान्यता प्राप्त नियमित शिक्षा बोर्ड

भारत में रेगुलर स्कूल शिक्षा का संचालन केंद्रीय एवं राज्य स्तर के बोर्डों द्वारा किया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं—

  • केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
  • भारतीय विद्यालय प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद
  • विभिन्न राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जैसे
    • उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद
    • महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
    • राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
    • बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
    • मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल
    • पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
    • तमिलनाडु राज्य बोर्ड
    • कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा, पंजाब आदि के बोर्ड

ये बोर्ड परंपरागत विद्यालयों के माध्यम से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा प्रदान करते हैं।

भारत में ओपन स्कूल शिक्षा बोर्डों की भूमिका

ओपन स्कूलिंग उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है जो किसी कारणवश नियमित स्कूल नहीं जा पाते। इसमें कामकाजी छात्र, ड्रॉप-आउट, महिलाएँ, ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षार्थी और आजीवन शिक्षा चाहने वाले लोग शामिल हैं।

भारत के प्रमुख ओपन स्कूल बोर्डों में शामिल हैं—

  • राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान
  • विभिन्न राज्य मुक्त विद्यालयी शिक्षा परिषदें
  • केन्द्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड (CBOSE)

CBOSE: भारत में ओपन स्कूल शिक्षा का उभरता नाम

केन्द्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड (CBOSE) भारत में ओपन स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में एक उभरता हुआ बोर्ड है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप लचीली, समावेशी और छात्र-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है।

CBOSE का उद्देश्य—

  • कक्षा 10 एवं कक्षा 12 स्तर की मुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना
  • शिक्षा से वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना
  • पारदर्शी परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था विकसित करना
  • डिजिटल एवं आधुनिक प्रशासनिक प्रणाली अपनाना

आज ओपन स्कूल बोर्ड केवल वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और आजीवन सीखने की अवधारणा का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं।

भारत में विदेशी शिक्षा बोर्ड

भारत में कुछ विदेशी शिक्षा बोर्ड भी कार्यरत हैं, जो अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। ये बोर्ड मुख्यतः निजी अंतरराष्ट्रीय स्कूलों के माध्यम से संचालित होते हैं और विशेष मानदंडों के तहत कार्य करते हैं।

विदेशी बोर्डों की मान्यता और स्वीकार्यता संस्थान-विशेष एवं विश्वविद्यालय-विशेष पर निर्भर करती है।

तो क्या भारत में सच में 72 शिक्षा बोर्ड हैं?

“72 शिक्षा बोर्ड” का आंकड़ा अक्सर इंटरनेट पर दिखाई देता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि—

  • भारत में केंद्रीय, राज्य, ओपन और विदेशी बोर्डों को मिलाकर बड़ी संख्या में बोर्ड कार्यरत हैं
  • सभी बोर्ड समान स्तर की मान्यता नहीं रखते
  • किसी बोर्ड की उपयोगिता नीतिअनुरूपता, परीक्षा प्रणाली और संस्थागत स्वीकार्यता पर निर्भर करती है

इसलिए विद्यार्थियों को किसी भी बोर्ड का चयन करते समय उसकी संरचना, उद्देश्य और भविष्य की उपयोगिता को समझना आवश्यक है।

निष्कर्ष

भारत में शिक्षा बोर्डों की संख्या भले ही अधिक हो, लेकिन सही जानकारी के बिना भ्रम पैदा हो सकता है। आज के समय में रेगुलर, ओपन और विदेशी बोर्डतीनों की अपनीअपनी भूमिका है।

केन्द्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड (CBOSE) जैसे ओपन स्कूल बोर्ड भारत में शिक्षा को अधिक सुलभ, लचीला और समावेशी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।

डिस्क्लेमर

यह लेख सामान्य सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी बोर्ड की मान्यता और स्वीकार्यता संबंधित विश्वविद्यालय, संस्थान और नियामक नीतियों पर निर्भर करती है।

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