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सूरत अहमदाबाद और वडोदरा में छठ पूजा महापर्व: लाखों की संख्या में श्रद्धालु होंगे शामिल
धर्म

गुजरात में छठ पूजा का बढ़ता महत्व: लाखों उत्तर भारतीयों के लिए हो रही तैयारियां

अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में इस वर्ष छठ पूजा महापर्व का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाएगा। खासकर उत्तर भारतीय समुदाय के बीच इस पर्व का महत्व पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ चुका है। 7 नवंबर को होने वाली छठ पूजा में लाखों लोग शामिल होंगे, जिसमें सूरत में लगभग 7 लाख, अहमदाबाद में 2 लाख, और वडोदरा में 35 हजार लोग शामिल होने का अनुमान है।

अहमदाबाद: साबरमती रिवरफ्रंट पर बड़े पैमाने पर पूजा

अहमदाबाद में छठ पूजा का प्रमुख आयोजन साबरमती रिवरफ्रंट पर होगा। नगर निगम और विभिन्न उत्तर भारतीय संगठनों ने पूजा घाट की सफाई और तैयारियों का काम तेज़ी से शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि इस आयोजन में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, शहर के विधायक, नगर निगम अधिकारी और कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
7 नवंबर को शाम 4 बजे से शुरू होने वाली पूजा अगले दिन सुबह तक चलेगी। पूजा के दौरान 20,000 से 30,000 लोग पूजा करने के लिए साबरमती नदी के किनारे एकत्रित होंगे।

सूरत में पूजा स्थलों पर विशेष व्यवस्था

सूरत में छठ पूजा के आयोजन के लिए खास तौर पर नदियाँ, झीलें और नहरों के किनारे पूजा स्थलों की व्यवस्था की गई है। यहां पर अनुमानित 7 लाख लोग पूजा करेंगे। सूरत नगर निगम और पुलिस विभाग ने सुरक्षा और सफाई के विशेष प्रबंध किए हैं, ताकि यह पर्व शांति और धूमधाम से मनाया जा सके।

वडोदरा में भी हो रही है बड़े स्तर पर तैयारियां

वडोदरा में भी छठ पूजा का आयोजन 35,000 लोग करेंगे। वडोदरा के विभिन्न इलाकों में पूजा के लिए स्थलों का चयन किया गया है और नगर निगम द्वारा यहां भी सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

भोज, आवास और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था

इस बार पूजा-अर्चना के लिए आने वाले दूर-दराज से आए लोगों के लिए आवास और भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है। हर पूजा स्थल पर 5,000 से अधिक लोगों के लिए रात्रि भोज का इंतजाम किया जाएगा। साथ ही, पुलिस और नगर निगम की टीमों द्वारा पूजा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए अलग से इंतजाम किए गए हैं।

छठ पूजा का सांस्कृतिक महत्व

छठ पूजा उत्तर भारत के खासकर बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र का प्रमुख पर्व है। यह पर्व डूबते सूर्य और उगते सूर्य की पूजा से जुड़ा होता है, जिसमें महिलाएं तीन दिनों तक व्रत करती हैं। पूजा के अंतिम दिन, सूर्य देव को अर्ध्य देने के लिए लोग नदी या तालाब के पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्ध्य देते हैं।
अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में अब छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव बन चुका है, जो सभी समुदायों को एक साथ जोड़ता है।

भोजपुरी कलाकारों की प्रस्तुति

इस बार के छठ पूजा महापर्व में खास सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। भोजपुरी गायकों को भी आमंत्रित किया गया है, जिनमें गीता दुबे और अमर रघुवंशी जैसे मशहूर कलाकार शामिल हैं। इन कलाकारों के भक्ति गीतों से वातावरण में भक्ति और उल्लास का माहौल होगा।

भविष्य में और बढ़ेगा छठ पूजा का आयोजन

उत्तर भारतीय विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्यामसिंह ठाकुर और प्रदेश अध्यक्ष महेश सिंह कुशवाह ने कहा कि गुजरात में उत्तर भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, और ऐसे में छठ पूजा के आयोजन का स्तर आने वाले वर्षों में और भी बड़ा होगा। नगर निगम और विभिन्न संगठनों के सहयोग से यह पर्व हर साल और भी व्यवस्थित और धूमधाम से मनाया जाएगा।

गुजरात में छठ पूजा का महत्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि यह एक सामाजिक उत्सव बन चुका है, जो उत्तर भारतीय समुदाय के लोगों को एकजुट करता है।

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